॥ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥
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श्री

॥ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥

श्रीनिम्बार्क सम्प्रदाय
SHRI NIMBARKA SAMPRADAYA
द्वैताद्वैत वेदान्त की दिव्य परम्परा
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SHRI NIMBARKA SAMPRADAYA · EDITORIAL CHARTER

सम्पादकीय एवं स्रोत-प्रामाणिकता नीति

यह मंच एक स्वतंत्र सार्वजनिक ज्ञान एवं विरासत परियोजना है। इसका उद्देश्य सामग्री का जिम्मेदारी से संरक्षण और प्रस्तुतीकरण करना है। प्रमाणित ऐतिहासिक साक्ष्य, परम्परागत मान्यताएँ और अभी समीक्षा में चल रही सामग्री—इनके बीच स्पष्ट अन्तर रखा जाएगा।

01

पहचाने जा सकने वाले स्रोत

प्रकाशित दावों के साथ उपलब्ध लेखक, ग्रन्थ-नाम, संस्करण, प्रकाशक, पृष्ठ, पाण्डुलिपि-पत्र, अभिलेख संख्या अथवा श्लोक-सन्दर्भ दिया जाएगा।

02

अनुमान से पाठ पूरा नहीं होगा

अस्पष्ट, खण्डित अथवा लुप्त पाण्डुलिपि-पाठ को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाएगा। उसे अनुमान से पूरा नहीं किया जाएगा।

03

परम्परा और इतिहास में अन्तर

परम्परागत वृत्तान्त को परम्परागत वृत्तान्त के रूप में ही पहचाना जाएगा। उसे स्वतः स्वतंत्र रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं कहा जाएगा।

04

कर्मकाण्डीय शुद्धता

मन्त्र, न्यास, यन्त्र और पूजन-विधान सावधानी से उतारे जाएँगे। अप्रमाणित पाठ अथवा विभिन्न परम्परागत पाठों को छिपाकर एकरूप नहीं किया जाएगा।

05

समीक्षा एवं संशोधन

सन्दर्भ सहित सुधार-सुझाव स्वीकार किए जाएँगे। समीक्षा के बाद सामग्री में संशोधन-तिथि और सम्पादकीय टिप्पणी जोड़ी जा सकेगी।

06

निःशुल्क सार्वजनिक सामग्री

मंच की प्रकाशित शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सामग्री सार्वजनिक रूप से बिना शुल्क उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।

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